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Method

यह series कैसे लिखी जाती है

इतिहास को कहानी की तरह सुनाया जा सकता है — पर सिर्फ़ तब, जब कहानी के लिए तथ्य न बदले जाएँ। यह पन्ना उन नियमों का है जिनसे यह project समझौता नहीं करता।

Rule 01

नाटक के लिए तथ्य नहीं गढ़े जाते

कहानी में suspense होना चाहिए, tension होनी चाहिए, इंसानी भावना होनी चाहिए। पर अगर किसी दृश्य के लिए साक्ष्य नहीं है, तो उसे ऐतिहासिक तथ्य की तरह नहीं लिखा जाता।

जहाँ किसी काल्पनिक पुनर्निर्माण से समझ बेहतर होती है, वहाँ वह अलग box में आता है और उस पर साफ़ लिखा होता है — Dramatized Reconstruction — काल्पनिक उदाहरण — और साथ में यह भी कि वह किन प्रमाणों पर आधारित है।

इसी वजह से आपको इस site पर किसी काल्पनिक किसान या सैनिक का नाम नहीं मिलेगा जिसे असली व्यक्ति की तरह पेश किया गया हो।

Rule 02

साक्ष्य का स्तर हमेशा दिखता है

चार लेबल, हर जगह एक जैसे

इतिहास में हर बात एक जैसी पक्की नहीं होती। इसे छिपाना पाठक के साथ बेईमानी है।

Established
कई स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट। इतिहासकारों में व्यापक सहमति है।
Probable
अधिकांश विद्वान इसे मानते हैं, पर यह पूरी तरह निर्विवाद नहीं है।
Debated
साक्ष्य एक से अधिक व्याख्याओं की गुंजाइश देता है, और बहस चालू है।
Legendary
मुख्यतः बहुत बाद के ग्रंथों या लोक-परंपरा से ज्ञात। समकालीन साक्ष्य नहीं।

Rule 03

स्रोत का पक्ष भी बताया जाता है

कोई स्रोत तटस्थ नहीं होता। दरबारी इतिहासकार वही लिखता है जो दरबार लिखवाना चाहता है। प्रशस्ति में हार कभी दर्ज नहीं होती। विदेशी यात्री वही देखता है जो उसकी दिलचस्पी का है। धार्मिक परंपरा अपने संस्थापक की कहानी को अपने ढाँचे में ढालती है।

इसलिए इस site पर हर स्रोत के साथ यह भी लिखा है कि वह किस चीज़ में कमज़ोर है। और जहाँ दो स्रोत टकराते हैं — जैसे अकबर पर अबुल फ़ज़ल और बदायूँनी — वहाँ दोनों दिए जाते हैं।

कोई citation गढ़ी नहीं जाती। जहाँ स्रोत सत्यापित नहीं हो सका, वहाँ “Source verification required” लिखा जाता है।

सभी 70 स्रोत देखें →

Rule 04

इतिहास को दो पक्षों में नहीं बाँटा जाता

यह इस project का सबसे सख़्त नियम है। भारतीय इतिहास को अक्सर ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’, ‘अच्छा राजा बनाम बुरा राजा’, या ‘भारत बनाम विदेशी’ में समेट दिया जाता है। यह इतिहास नहीं है — यह आज की राजनीति को अतीत पर चढ़ाना है।

हल्दीघाटी में मुग़ल सेना का नेतृत्व एक राजपूत कर रहा था। शिवाजी की सेना और प्रशासन में मुस्लिम अधिकारी थे। औरंगज़ेब के प्रशासन में हिंदू अधिकारियों का अनुपात अकबर के समय से अधिक था। दिल्ली सल्तनत का सबसे बड़ा ख़तरा किसी भारतीय शक्ति से नहीं, मंगोलों से था।

ये तथ्य किसी एक पक्ष को सुविधा नहीं देते — और यही कारण है कि इन्हें दर्ज करना ज़रूरी है। घटनाएँ राजनीति, अर्थव्यवस्था, भूगोल, सेना, व्यापार और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से समझाई जाती हैं।

Rule 05

इतिहास सिर्फ़ राजाओं का नहीं है

हर महल के पीछे राजमिस्त्री हैं। हर सेना के पीछे वे किसान हैं जिन्होंने उसका अनाज उगाया। हर अभिलेख के पीछे वह कारीगर है जिसने पत्थर पर छेनी चलाई — और जिसका नाम उस अभिलेख में नहीं है।

इसलिए हर season में ‘एक दिन उस समय के भारत में’ खंड है, जो किसान, कारीगर, सैनिक, व्यापारी और स्त्रियों के जीवन को उसी गंभीरता से देखता है — पुरातत्व और समकालीन विवरणों के आधार पर, और स्पष्ट लेबल के साथ कि उसमें पुनर्निर्माण कहाँ है।

Rule 06

जो नहीं पता, वह भी लिखा जाता है

हर season के dossier में एक खंड है — ‘जो हम नहीं जानते’। सिंधु लिपि नहीं पढ़ी गई। हड़प्पा की राजनीतिक व्यवस्था अज्ञात है। बुद्ध की सटीक तिथियाँ विवादित हैं। भीमबेटका के अधिकांश चित्रों की उम्र निश्चित नहीं।

इन खालीपनों को भर देना आसान होता — और वही सबसे बड़ी बेईमानी होती।

Production status

इस समय 25 seasons की पूरी संरचना और research dossier तैयार है। इनमें से 4 season के 37 episodes पूरी तरह लिखे जा चुके हैं और पढ़े जा सकते हैं; बाक़ी seasons के लिए 207 episodes outline किए जा चुके हैं और उनकी स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।

यह स्थिति हर season page पर साफ़ दिखाई जाती है। एक चलती हुई series में यह सामान्य है — और इसे छिपाना उन्हीं नियमों के ख़िलाफ़ होता जो ऊपर लिखे हैं।