Episode 02
सोलह
महाजनपदों का नक्शा
दो अलग-अलग परंपराएँ — बौद्ध और जैन — सोलह बड़े राज्यों की सूची देती हैं। और वे लगभग एक जैसी हैं।
सुनाना शुरू करेंपूरी स्क्रीन पर, एक बार में एक बात — पढ़कर सुनाने के लिए।
काल
c. 600 – 500 BCE
क्षेत्र
गांधार से अंग तक, कंबोज से अश्मक तक
पढ़ने का समय
16 मिनट
Runtime
~19 मिनट
Synopsis
यह episode महाजनपदों का नक्शा खोलता है, और साथ ही यह भी दिखाता है कि दो स्वतंत्र स्रोतों का मेल इतिहासकार के लिए क्यों क़ीमती होता है।
दो सूचियाँ
इतिहासकार के लिए सबसे ख़ुशी की बात क्या होती है? जब दो ऐसे स्रोत एक ही बात कहें जो एक-दूसरे से नक़ल नहीं कर सकते थे।
यहाँ ठीक वही हुआ है।
बौद्ध परंपरा के अंगुत्तर निकाय में सोलह महाजनपदों की सूची है। और जैन परंपरा के भगवती सूत्र में भी सोलह की सूची है।
ये दो अलग धार्मिक परंपराएँ हैं, जो एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी थीं। इनका उद्देश्य भूगोल पढ़ाना नहीं था — ये सूचियाँ प्रसंगवश आती हैं।
और फिर भी दोनों सोलह कहती हैं, और उनमें से अधिकांश नाम मिलते हैं।
नक्शा
आइए इन्हें भूगोल के हिसाब से देखते हैं, क्योंकि इस series में भूगोल हमेशा कारण होता है।
उत्तर-पश्चिम — दर्रों के पास
- गांधार
- तक्षशिला केंद्र; फ़ारस और मध्य एशिया से सीधा संपर्क
- कंबोज
- और आगे उत्तर-पश्चिम; घोड़ों के लिए प्रसिद्ध
मध्य — पुराना वैदिक क्षेत्र
- कुरु
- इंद्रप्रस्थ क्षेत्र; उत्तर वैदिक परंपरा का पुराना केंद्र
- पांचाल
- ऊपरी दोआब; दार्शनिक बहसों का केंद्र रहा
- मत्स्य, शूरसेन
- राजस्थान-मथुरा क्षेत्र
पश्चिम और दक्षिण
- अवंति
- उज्जयिनी और महिष्मती; पश्चिमी व्यापार-मार्गों पर नियंत्रण
- अश्मक
- गोदावरी क्षेत्र — सूची में एकमात्र दक्षिणी नाम
पूर्व — जहाँ असली होड़ है
- वत्स
- कौशांबी; यमुना पर व्यापार का बड़ा केंद्र
- काशी
- वाराणसी; कपड़े के लिए दूर तक प्रसिद्ध
- कोसल
- श्रावस्ती और अयोध्या; मगध का सबसे बड़ा आरंभिक प्रतिद्वंद्वी
- मगध
- राजगृह; और आगे चलकर पाटलिपुत्र
- अंग
- चंपा; गंगा पर बंदरगाह, और मगध की पहली विजय
- वज्जि, मल्ल, चेदि
- इनमें वज्जि और मल्ल गण-संघ थे
'महाजनपद' शब्द का मतलब
इस शब्द को खोलकर देखिए, क्योंकि उसमें पूरी कहानी है।
एक शब्द, तीन परतें
- जन
- लोगों का समूह, कबीला — पिछले season का शब्द
- जनपद
- जन के 'पद' — यानी जहाँ वह जन जमकर बैठ गया; एक क्षेत्र
- महाजनपद
- बड़ा जनपद — यानी कई जनपदों को मिलाकर बना बड़ा राज्य
यह भाषाई सफ़र वही है जो हमने ज़मीन पर देखा — घूमते हुए कबीले से जमे हुए राज्य तक।
दावा और आधार
Probableसंभावित'जनपद' शब्द ही बताता है कि यह पहचान अब भूमि से जुड़ चुकी थी, केवल वंश से नहीं।
आधार क्या है
आरंभिक वैदिक साहित्य में पहचान मुख्यतः जन से थी — आप भरत हैं या पुरु। महाजनपद-काल के साहित्य में लोग प्रायः क्षेत्र से पहचाने जाते हैं — मागध, कौसल, अवंतिक। यह पहचान का ज़मीन से जुड़ना है।
स्रोत — Early India: From the Origins to AD 1300 · Romila Thapar
यह छोटा-सा लगने वाला बदलाव असल में बहुत बड़ा है। जब पहचान वंश से हटकर क्षेत्र से जुड़ती है, तो सीमा नाम की चीज़ मायने रखने लगती है। और सीमा जहाँ मायने रखे, वहाँ युद्ध का कारण बदल जाता है — अब वह गाय के लिए नहीं, ज़मीन के लिए होता है।
और फिर संख्या घटने लगती है
अब इस पूरी सूची की सबसे अहम बात। यह सोलह की सूची ज़्यादा दिन नहीं टिकी।
छठी सदी BCE में सोलह हैं। पाँचवीं सदी आते-आते चार बड़े बचते हैं — मगध, कोसल, वत्स और अवंति। और चौथी सदी तक मगध लगभग सबको निगल चुका है।
तो सवाल बनता है: मगध ही क्यों?
और इसका जवाब न किसी राजा की महानता में है, न किसी दैवी कृपा में।
वह ज़मीन में है।
एक और चीज़, जो इसी नक्शे पर है
इस नक्शे को देखते हुए एक और बात ध्यान देने लायक़ है।
इन सोलह में से कुछ राजतंत्र हैं — जहाँ एक राजा है, वंश है, अभिषेक है। और कुछ गण-संघ हैं — जहाँ फ़ैसले सभा में होते हैं।
इस दौर के प्रमुख गण-संघ
- वज्जि संघ — जिसमें लिच्छवि सबसे प्रमुख थे; राजधानी वैशाली।
- मल्ल — कुशीनगर और पावा के आसपास।
- शाक्य — कपिलवस्तु; और यहीं सिद्धार्थ गौतम का परिवार था।
- कोलिय, मोरिय, भग्ग और अन्य छोटे संघ।
और अगला episode पूरा इसी टकराव पर है — राजा बनाम सभा।
दो तरीक़े, एक भविष्य
छठी सदी BCE के उत्तर भारत में शासन के दो अलग तरीक़े साथ-साथ चल रहे थे।
एक में फ़ैसला एक आदमी करता है। दूसरे में सभा।
अगले episode में हम देखेंगे कि दोनों कैसे काम करते थे — और यह भी कि उनमें से एक क्यों नहीं बचा।
— कहानी यहाँ ख़त्म —
इसके पीछे का शोध
नीचे वह सब है जिस पर यह episode खड़ा है — स्रोत, बहसें, और वह जानकारी जो कहानी में नहीं आ सकी।
At a glance
कहाँ, कब, कौन, क्या, क्यों, कैसे
Where
कहाँ?
उत्तर-पश्चिम में गांधार और कंबोज से लेकर पूर्व में अंग तक; दक्षिण में अश्मक।
When
कब?
छठी सदी BCE के आसपास।
Who
कौन?
सोलह बड़े राज्य — कुछ राजतंत्र, कुछ गण-संघ।
What
क्या हुआ?
उत्तर भारत का पहला ऐसा राजनीतिक नक्शा जिसे हम नाम लेकर बना सकते हैं।
Why
क्यों?
क्योंकि दो स्वतंत्र ग्रंथ-परंपराएँ इनकी सूची देती हैं।
How
कैसे?
बौद्ध अंगुत्तर निकाय और जैन भगवती सूत्र में — और उनमें अंतर भी हैं।
Consequence
फिर क्या बदला?
इनमें से अधिकांश अगले दो सौ वर्षों में एक ही राज्य में समा जाएँगे।
Takeaways
इस episode की मुख्य बातें
- 01दो प्रतिद्वंद्वी परंपराएँ — बौद्ध और जैन — लगभग एक जैसी सूची देती हैं; अंतर भी उतने ही उपयोगी हैं।
- 02'जन' से 'जनपद' तक का सफ़र पहचान का ज़मीन से जुड़ना है।
- 03सोलह में से आधे से ज़्यादा पूर्वी गंगा घाटी में हैं — केंद्र पंजाब से हट चुका है।
- 04छठी सदी में सोलह, पाँचवीं में चार, चौथी तक लगभग एक।
- 05बुद्ध और महावीर दोनों गण-संघ पृष्ठभूमि से आते हैं।
Myth vs history
प्रचलित मान्यता, और साक्ष्य
सोलह महाजनपदों की सूची एक निश्चित, तय सूची है
Probableसंभावितप्रचलित मान्यता
सोलह नाम पत्थर की लकीर की तरह तय हैं।
साक्ष्य क्या कहता है
बौद्ध और जैन सूचियाँ पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं; कुछ नाम अलग हैं। 'सोलह' संख्या स्वयं भी प्राचीन भारतीय साहित्य में एक प्रचलित, गोल संख्या की तरह इस्तेमाल होती है। इसलिए यह एक विश्वसनीय मोटा चित्र है, कोई सरकारी जनगणना नहीं।
In this episode
लोग, स्थान, घटनाएँ
स्थान · राजगीर, बिहार
राजगृह
पाँच पहाड़ियों से घिरी घाटी — प्राकृतिक क़िला।
स्थान · उज्जैन, मध्य प्रदेश
उज्जयिनी
उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम मार्गों का चौराहा।
स्थान · रावलपिंडी, पंजाब (पाकिस्तान)
तक्षशिला
उत्तरापथ पर, दर्रों के ठीक पीछे — जो भी भारत में आया, यहीं से गुज़रा।
स्थान · पटना, बिहार
पाटलिपुत्र
गंगा, सोन और गंडक के संगम पर — तीन दिशाओं में पानी की सुरक्षा और चारों दिशाओं में नदी-मार्ग।
घटना · c. 600 BCE
सोलह महाजनपद
मगध, कोसल, वत्स, अवंति और अन्य — राजतंत्र और गणतंत्र दोनों। दूसरा नगरीकरण शुरू होता है: सिक्के, किले, बाज़ार, कर।
Sources
इस episode के स्रोत
और उनकी सीमाएँ- आधुनिक इतिहासकार2002
Early India: From the Origins to AD 1300
Romila Thapar
प्राचीन भारत का मानक आधुनिक सर्वेक्षण; स्रोत-आलोचना पर विशेष बल।
- आधुनिक इतिहासकार2008
A History of Ancient and Early Medieval India
Upinder Singh
पुरातत्व और ग्रंथों को साथ रखकर पढ़ने वाला विस्तृत textbook।
- आधुनिक इतिहासकार1983, 2005
India's Ancient Past; Material Culture and Social Formations in Ancient India
R. S. Sharma
भौतिक परिस्थितियों — लोहा, कृषि, अधिशेष — से सामाजिक परिवर्तन समझने की धारा।
Reading the labels
साक्ष्य के चार स्तर
- Established
- कई स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट। इतिहासकारों में व्यापक सहमति है।
- Probable
- अधिकांश विद्वान इसे मानते हैं, पर यह पूरी तरह निर्विवाद नहीं है।
- Debated
- साक्ष्य एक से अधिक व्याख्याओं की गुंजाइश देता है, और बहस चालू है।
- Legendary
- मुख्यतः बहुत बाद के ग्रंथों या लोक-परंपरा से ज्ञात। समकालीन साक्ष्य नहीं।